मेरी ज़िन्दगी को फूलों सा महकता हुआ
कोई गुलशन तुम बना दो,
मेरे जिस्म के ज़र्रे ज़र्रे में
तुम अपनी साँसों की खुशबू मिला दो,
लेकर चिराग अपनी मोहब्बत का
गम के अंधेरों को आके मिटा दो,
बहुत रोये हैं हम चुप चुप के
मेरे लबों को मुस्कराना सीखा दो,
आँखें तरस रही एक मुद्दत से मेरी
आज तो इस चिलमन को उठा दो,
बनते बिगड़ते मतलबी रिश्तों के बीच
एक पाक रिश्ता मुझसे बना लो……!!!
कोई गुलशन तुम बना दो,
मेरे जिस्म के ज़र्रे ज़र्रे में
तुम अपनी साँसों की खुशबू मिला दो,
लेकर चिराग अपनी मोहब्बत का
गम के अंधेरों को आके मिटा दो,
बहुत रोये हैं हम चुप चुप के
मेरे लबों को मुस्कराना सीखा दो,
आँखें तरस रही एक मुद्दत से मेरी
आज तो इस चिलमन को उठा दो,
बनते बिगड़ते मतलबी रिश्तों के बीच
एक पाक रिश्ता मुझसे बना लो……!!!
No comments:
Post a Comment